एक रात की बात है, एक छोटे से गाँव में जहां हर कोने में चाय की खुशबू फैली हुई थी, वहां एक पुराने हवेली के पास एक अजीब-सी घटना हो गई। हवेली का नाम 'मृत्यु की इच्छा' था। इस हवेली का इतिहास बहुत पुराना था और कहा जाता था कि यहां रात के समय कुछ अजीब-सी आवाजें सुनाई देती हैं। लेकिन कोई भी वहां जाने को तैयार नहीं था। इस भूतिया हवेली के बारे में कहानी हमारी शुरू होती है।
गाँव में एक गरीब लड़का था जिसका नाम राहुल था। राहुल एक बहुत ही मेहनती और सच्चे दिल का लड़का था। वह गाँव के लोगों की सहायता करने के लिए हमेशा तैयार रहता था। एक दिन, गाँव के बड़े आदमी ने राहुल से मिलकर एक काम का प्रस्ताव दिया।
"राहुल, मेरे पुराने हवेली को साफ-सुथरा करने का काम तुम्हारे ऊपर है। तुम अगर इस काम को पूरा कर लोगे तो तुम्हें अच्छा मुआवजा मिलेगा," बड़े आदमी ने कहा।
राहुल ने हाँ कह दी और अगले ही दिन से काम में लग गया। हवेली की सफाई करने के दौरान उसे बहुत सारी बातें सुनने को मिलीं। लोग कहते थे कि इस हवेली में रात के समय अजीब-सी आवाजें आतीं हैं और वहां कोई भूत होता है। लेकिन राहुल ने यह सभी बातें नकारात्मक रूप से लिया।
एक रात, राहुल ने रात के समय हवेली की सफाई करते हुए अचानक एक अजीब सी आवाज सुनी। वह आवाज से परेशान हो गया और सोचने लगा कि क्या वहां सचमुच कोई भूत है।
"क्या यह सच हो सकता है?" राहुल ने सोचा और हवेली के अंदर की ओर बढ़ा। वह अंधेरे में हवेली के अंदर बढ़ता हुआ देखता है कि एक पुराने कुर्सी पर एक पुराने आदमी बैठा हुआ है।
"कौन हो तुम?" राहुल ने पूछा।
आदमी ने मुस्कराते हुए कहा, "मैं एक समय यहीं के मालिक था। मेरा नाम विक्रम था। लेकिन एक दिन मैं मर गया और मेरी आत्मा इस हवेली में फंस गई।"
राहुल ने हैरान होकर कहा, "तुम एक भूत हो?"
"हाँ," विक्रम ने कहा, "लेकिन मैं भूत नहीं हूँ जो दुनिया को डराए। मैं एक अधूरा काम के बजाय छोड़ा गया हूँ और मुझे शांति नहीं मिली। मेरी आत्मा इस हवेली में फंसी हुई है, और मैं इस संसार को छोड़ने के बाद भी शांति की तलाश में हूँ।"
राहुल ने समझाया, "तुम्हें शांति कैसे मिल सकती है?"
विक्रम ने कहा, "मेरी एक आखिरी इच्छा है जो मैं इस दुनिया से जाकर पूरी करना चाहता हूँ। जब मैं जिन्दा था, मैंने एक खजाने का पत्ता लगाया था, लेकिन मैं उसे नहीं निकाल सका। मेरी आत्मा शांति पाएगी जब कोई मेरी आखिरी इच्छा पूरी करेगा।"
राहुल ने कहा, "तुम्हारी इच्छा क्या है?"
"मेरी इच्छा है कि मेरे खजाने को निकाला जाए और उसे गरीबों के बीते हुए दिनों में खर्चा करा जाए।"
राहुल ने ठान लिया कि वह विक्रम की आखिरी इच्छा को पूरा करेगा। वहने अगले कुछ दिनों में हवेली के अंदर छुपे खजाने की खोज में जुट जाता है। उसने अपनी जांच के बाद एक पुराने अलमारी को खोला और वहां से एक पुराने दस्तार निकाला।
दस्तार को खोलने के बाद, राहुल को अच्छूती ने कुछ चीजें मिलीं, जैसे कि सोने के सिक्के, मोतियों से भरीं माला, और बहुत कुछ। इन चीजों के साथ एक छोटा सा पत्र भी था जिसमें विक्रम ने अपनी इच्छा लिखी थी।
राहुल ने सब कुछ ले कर विक्रम के सामने रखा और कहा, "तुम्हारी आखिरी इच्छा पूरी हो गई है।"
विक्रम ने मुस्कराते हुए कहा, "तुमने मेरी आत्मा को शांति दिलाई है, राहुल। मैं अब इस संसार को छोड़ सकता हूँ।"
उसके बाद, विक्रम की आत्मा हवेली के अंदर से निकली और स्वर्ग की ओर चली गई। हवेली का माहौल एकदम स्वर्गीय हो गया और राहुल को बहुत खुशी हुई कि उसने एक आत्मा को शांति दिलाई।
गाँववालों ने भी इस सबको देखा और राहुल की बहादुरी को सराहा। वह एक ही रात में गाँव का हीरो बन गया और सभी लोगों की प्रशंसा का पत्ता लगाया।

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